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Thursday, 20 October 2016

Journey Of Sanjay Shaferd On Cycle

कहते है ज़िन्दगी में किसी मुकाम को पाने 
या फिर किसी तलाश को पूरा करने के लिए धुन का होना जरूरी है
और जब होती है धुन सवांर तो बिना किसी परवाह किये निकल पड़ते है राही मंज़िल की तलाश में
ये तलाश कभी अपने लिए तो कभी अपनों के लिए , लेकिन जब ये तलाश  किसी  साहित्यकर्मी की हो तो बात अपने लिए , अपनों के लिए तक ही सीमित नहीं बल्कि  समाज के लिए होती है .
जी हां दोस्तों एक ऐसी ही तलाश से रूबरू होंगे आप 
धुन ज़िन्दगी की ...
कविता और साहित्य प्रेम से लोगो के दिलों में एक खास जगह बना चुके संजय शेफर्ड 
अपने जीवन के बेहद ही रोमांचक यादगार सफर पर निकल रहे है
ये सफर राइडिंग फॉर पोएट्री अभियान  पुरे एक माह का होगा जो कि नवम्बर महीने से शुरू होगा
एक माह की इस यात्रा के दौरान  उत्तराखंड के कई जिलों में कई पड़ताल भी करना चाहते है संजय शेफर्ड
इस सफर का मुख्य उद्देश्य ट्रेडिशनल मेडिसिन, डार्क टूरिज्म, ब्लैक टूरिज्म, ग्रेव टूरिज्म और सेक्स टूरिज्म जैसी  चीजों की खोज  करना समाज में हो रही गतिविधियों को देखना समझना है .
तो आइए जानते है इस सफर से जुडी तमाम जानकारियां किताबनामा और हिंदी स्टूडियो के संस्थापक संजय शेफर्ड से ...
कब शुरू होगी यात्रा , इस यात्रा में क्या खास होगा और क्या इस सफर का उद्देश्य है ?
नवम्बर महीने से एक माह की यह यात्रा शुरू होगी.साइकिल से इस साहित्य यात्रा पर निकल रहा हूं. इस दौरान उत्तराखण्ड के सभी 13 जिलों में साहित्य, संस्कृति और समाज को जानने- समझने का प्रयास करूंगा. हालांकि उत्तराखंड का मैं 2-3 बार स्टेट- कोऑर्डिनेटर रह चुका हूं, वहां के जन- जीवन और संस्कृति से भलीभांति वाक़िब हूं. बावजूद इसके वहां अभी भी समझने के लिए बहुत कुछ बाकि रह गया था जिसे अब पूरा करने जा रहा हूं. मैं वहां के कला एवं साहित्य जगत से जुड़े लोगों से मिलूंगा, उनके जन्मस्थान पर जाकर कुछ समय व्यतीत करूंगा. ट्रेडिशनल मेडिसिन, डार्क टूरिज्म, ब्लैक टूरिज्म, ग्रेव टूरिज्म और सेक्स टूरिज्म जैसी अकल्पनीय चीजों की खोज करूंगा. विभिन्न (13 ) नवोदय विद्यालयों में जाकर अपने छोटे भाई बहनों से मिलूंगा. उनकी हिन्दी को अपनी नई वाली हिन्दी की मुलाक़ात करवाऊंगा. उन्हें दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे महिला हिंसा, तेजाब हमलों से अवगत कराऊंगा और आलोक भाई, आशीष बाबा, लक्ष्मी के कैम्पेन स्टॉप एसिड अटैक के बारे में बताऊंगा. असीम भाई उस समय यूरोप के किसी देश में होंगे पर बातचीत होती रहेगी.
मेरे पास से इस दौरान मेरे एटीएम, डेविट कार्ड, क्रेडिट कार्ड सब छीन लिए जायेंगे. कुछ कैश होगा जो एक हजार से भी कम होगा. मिलना दुर्लभ होता है पर मैंने वाइल्ड फ्रूट और वेजिटेबल की सारी जानकारी रख ली है. कुछ कांटेक्ट भी निकाल लिए हैं. सारे लोग मेरे संपर्क में सोशल मीडिया पर बने रहेंगे. मुझे दिन में यात्रा करनी होगी. रातें किसी गांव- देहात या घाटी में खुले आसमान के नीचे टेंट में बितानी होगी. बैकअप के लिए प्रदेश के सभी जिला पर्यटन अधिकारी और सरकारी टूरिस्ट सेंटर मेरे सहयोगी होंगे. वह मुझसे मुलाकात के आलावा और कोई मदद नहीं कर सकेंगे. मेरा बैगपैक 12 किलोग्राम का होगा. जिसमें तीन जोड़ी कपडे, एक कैमरा, एक सटेलाइट फोन, एक लैपटॉप, टेंट, स्लीपिंग बैग, टार्च, रस्सी, हुक्कस, पानी की बोतल, कुछ जरुरी मेडिसिनस, हाई- बर्ड की तीन साइकल्स, और ढेर सारी दोस्तों की दुआएं होंगी

मेरी इस यात्रा को जेएनवी के 6 लाख स्टूडेंट सुपोर्ट करेंगे. वर्ल्ड की सबसे बड़ी स्टूडेंट एलुमनी All India JNV Alumni Association का सहयोग होगा. महेन्द्र, पुष्पेंद्र और सुरेश राठी जो मेरे बड़े भाई के समान हैं उनका मार्गदर्शन बीच- बीच में मिलता रहेगा. आप लोग भी अपना सहयोग बनाए रखें. खासकर उत्तराखंड के लोग मुझे होस्ट कर सकते हैं. मुझसे मिलकर कविताएं सुन सकते हैं. साहित्यिक चर्चा कर सकते हैं. किसी साहित्कार से मिलने के लिए सजेस्ट कर सकते हैं. इतने सारे काम एक माह में पूरा करना है. कविताएं लिखनी है. कुछ आर्टिकल लिखने हैं और दुनिया के लोगों के साथ अपडेट भी रहना है. तस्वीर,कविता और कहानी के साथ .
अनुज पारीक
(धुन ज़िन्दगी की)


3 comments:

  1. After going through ur blog and reading articles on various news papers . I also got influenced . I'm a student of symbiosis school of photography (photojournalism & social documentary and travel & landscape )I have a keen interest in travelling specifically doing Hitchhiking and writing poems . I have traveled to various remote places of India . After going through ur travel story I got an urge of becoming ur travelling companion . I have experienced the life of JNV very closely . I appreciate u for ur hardwork and deduction in field of poetry .

    Sharon singh
    sharon77.nick@gmail.com

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